आज सुबह की चाय के साथ अखबार के मुख्य पृष्ठ पर हीं न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री के पार्टनर की लिखी कहानी “महिलाओं को असली समानता तभी मिलेगी,जब पुरूष भी उनके काम करने लगें ” पढ़कर लगा जैसे उन्होंने मेरे दिल की बात लिख दी हो।हम हमेशा महिलाओं को पुरुषों के समान बनाने पर जोर देते हैं।आज महिलाएं हर वो कार्य कर रहीं हैं जो कार्य कभी सिर्फ पुरुषों के लिए हीं थे।महिलाओं तो अपनी बेड़ियाँ तोड़ रहीं हैं पर अभी भी घरेलू काम की जिम्मेदारी औरतों की ही है।इस दोहरी जिम्मेदारी को निभाते निभाते वो कितनी टूट चुकी होती है ये किसी को नजर नहीं आता साथ ही superwoman के तगमे के लालच में वो शिकायत भी नहीं कर पाती।अगर पुरूष उसकी सहायता करते भी हैं तो वो एक अहसान के रूप में होता है ।असली समानता तभी होगी जब घरेलू कामों का बँटवारा स्त्री पुरूष के बीचसमान रूपसे हो तथा इसे सामान्य रूप से ही देखा जाए न कि एक अजूबे जैसा।
Happy Women’s Day😊
